🙏 श्री गणेशजी की आरती: जय गणेश जय गणेश देवा (संपूर्ण पाठ) 🙏
**श्री गणेशजी की आरती** किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत में अनिवार्य रूप से गाई जाती है। भगवान गणेश, जिन्हें **विघ्नहर्ता** और **प्रथम पूज्य** के नाम से जाना जाता है, सभी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाते हैं। यह आरती उनकी स्तुति करती है और उनसे भक्तों के जीवन के सभी कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करती है।
📜 श्री गणेश आरती का संक्षिप्त इतिहास
"जय गणेश जय गणेश देवा" आरती के रचयिता के बारे में स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलते हैं, लेकिन यह सदियों से भारतीय उपमहाद्वीप में अत्यंत लोकप्रिय रही है। इस आरती का अंतिम पद **'सूर'** श्याम शरण आए... का उल्लेख करता है, जिससे कुछ लोग इसका श्रेय **सूरदास** को देते हैं, हालाँकि यह विवादित है। यह आरती मराठी परंपरा में अधिक प्रचलित है और इसका प्रयोग विशेष रूप से **गणेश चतुर्थी** के दौरान किया जाता है।
श्री गणेश आरती का महत्व और लाभ
- यह आरती **विघ्नों को हरने** और सभी कार्यों को सफल बनाने के लिए गाई जाती है।
- गणेश जी की पूजा से **बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि** प्राप्त होती है।
- यह **अंधे को आँख** और **निर्धन को माया** देने का आशीर्वाद देती है, जो भगवान की दयालुता को दर्शाता है।
📖 श्री गणेशजी की आरती - संपूर्ण पाठ (Center Aligned)
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।
'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
श्री गणेश आरती का पदवार सरल अर्थ
पद 1-2: गणेश जी का परिचय
यह पद भगवान गणेश की जय-जयकार करता है और उनका परिचय देता है: जिनकी माता **पार्वती** और पिता **महादेव** हैं।
पद 3: स्वरूप वर्णन और भोग
यहाँ उनके स्वरूप का वर्णन है: **एकदंत, चार भुजाओं वाले**, दयालु और मस्तक पर तिलक धारण करने वाले। उन्हें **लड्डुओं का भोग** प्रिय है, और संत उनकी सेवा करते हैं।
पद 4: कल्याणकारी शक्तियाँ
यह पद भगवान की चमत्कारी शक्तियों का गुणगान करता है: वे **अंधे को आँख**, **कोढ़ी को काया** (स्वस्थ शरीर), **बांझ को पुत्र** और **निर्धन को धन** (माया) प्रदान करते हैं। यह भक्तों पर उनकी असीम दयालुता को दर्शाता है।
❓ श्री गणेश आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q: गणेश आरती किस पूजा में गाना अनिवार्य है?
A: यह आरती किसी भी शुभ कार्य या पूजा के **आरंभ (शुरुआत)** और अंत में गाना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि गणेश जी विघ्नहर्ता हैं।
Q: गणेश जी को क्या भोग लगाना चाहिए?
A: आरती के अनुसार, गणेश जी को **लड्डुओं (मोदक)** का भोग प्रिय है। इसके अलावा, पान, फूल और मेवा भी चढ़ाया जाता है।
" श्री गणेश "
अगर आपको मेरी यह Blog post पसंद आती है तो Please इसे Facebook, Twitter, WhatsApp पर Share करें।
अगर आपके पास कोई सुझाव हो तो कृप्या Comment box में comment करें।